पवणु गुरू पाणी पिता माता धरति महतु…

पवणु गुरू पाणी पिता माता धरति महतु ॥
दिवसु राति दुइ दाई दाइआ खेलै सगल जगतु ॥

 

हवा गुरु है, पानी पिता है, और धरती महान माता है।
दिन और रात दो धायें (दाई माँ) हैं, और पूरे संसार का खेल इनकी छत्रछाया में चलता है।

गहरा विश्लेषण:

  1. प्रकृति का माता-पिता के रूप में सम्मान: “पवणु गुरू पाणी पिता माता धरति महतु” का भावार्थ यह है कि जिस तरह एक गुरु हमारा मार्गदर्शन करता है, उसी तरह हवा (वायु) भी हमारे जीवन का सहारा और मार्गदर्शक है। पानी को पिता के रूप में मान्यता दी गई है क्योंकि यह जीवन का स्रोत है और हमें स्थिरता प्रदान करता है। धरती को माता के रूप में देखा गया है, जो हमें पोषण और आश्रय देती है। इस पंक्ति में प्रकृति के तत्वों को माता-पिता के रूप में आदर देना सिखाया गया है, जिससे हमें उनकी महत्ता और हमारे जीवन में उनके महत्व का एहसास होता है।
  2. दिन और रात की धाय माँ के रूप में भूमिका: “दिवसु राति दुइ दाई दाइआ” का अर्थ है कि दिन और रात हमारे जीवन की देखभाल करने वाली धाय (पालने वाली) हैं। दिन हमें कार्य, प्रगति, और ज्ञान का अवसर देता है, जबकि रात हमें विश्राम और शांति प्रदान करती है। यह दर्शाता है कि जीवन का प्रत्येक क्षण, चाहे वह दिन हो या रात, हमें आगे बढ़ने का अवसर प्रदान करता है। संसार एक खेल है, और इसमें सब कुछ उस दैवीय व्यवस्था के तहत चलता है।
  3. जीवन का व्यापक दृष्टिकोण: इन पंक्तियों में, प्रकृति के तत्वों को सम्मान देने की प्रेरणा है और यह समझने का प्रयास है कि जीवन एक खेल की भांति चलता है, जहाँ दिन-रात हमें अलग-अलग भूमिकाओं में मार्गदर्शन करते हैं। यह हमें हमारे अस्तित्व की एकता और उस दिव्य शक्ति के प्रति हमारी निर्भरता का एहसास कराता है।

संदेश:

इस पंक्ति में प्रकृति के तत्वों के प्रति आदरभाव रखने की शिक्षा दी गई है। हमें सिखाया गया है कि हर क्षण, हर तत्व जो हमें जीवन देने और पोषित करने में योगदान देता है, हमारे लिए एक मार्गदर्शक और पालक की तरह है। इस प्रकार का दृष्टिकोण हमें पर्यावरण के प्रति सजग रहने और जीवन की महत्ता को समझने की प्रेरणा देता है।

सारांश:

“पवणु गुरू पाणी पिता माता धरति महतु” से लेकर “दिवसु राति दुइ दाई दाइआ खेलै सगल जगतु” तक का संदेश यह है कि प्रकृति के तत्व हमारे जीवन के आधार हैं, और दिन-रात जीवन को सँभालने वाली धायें हैं। यह दृष्टिकोण हमें हमारे अस्तित्व की एकता, प्रकृति के प्रति आभार, और पर्यावरण के संरक्षण की ओर प्रेरित करता है।

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