तिथै खंड मंडल वरभंड ॥ जे को कथै त अंत न अंत ॥
तिथै लोअ लोअ आकार ॥ जिव जिव हुकमु तिवै तिव कार ॥
वेखै विगसै करि वीचारु ॥ नानक कथना करड़ा सारु ॥
वहाँ अनगिनत संसार, ब्रह्मांड और लोक हैं, जिनका अंत कोई नहीं बता सकता।
हर लोक और आकार उस परमात्मा के आदेश से चलता है।
वह सब कुछ देखता है, खुश होता है, और विचार करता है।
नानक कहते हैं, इसे बयान करना अत्यंत कठिन है।
गहरा विश्लेषण:
- अनगिनत ब्रह्मांड और लोक: “तिथै खंड मंडल वरभंड” का अर्थ है कि उस दिव्य क्षेत्र (सचखंड) में अनगिनत संसार, ब्रह्मांड, और लोक मौजूद हैं। यह उस अनंतता की बात करता है जो परमात्मा के पास है। ये लोक और ब्रह्मांड इतनी अधिक मात्रा में हैं कि उनका न तो कोई सीमा है और न ही कोई अंत। यह हमें यह समझाने का प्रयास है कि परमात्मा की सृष्टि अनगिनत और असीमित है।
- हर चीज़ का परमात्मा के आदेश से होना: “तिथै लोअ लोअ आकार, जिव जिव हुकमु तिवै तिव कार” का मतलब है कि हर लोक, हर आकार, और हर जीव परमात्मा के आदेश से संचालित होते हैं। हर जीव और हर वस्तु की गतिविधि परमात्मा के आदेश पर निर्भर करती है। जिस प्रकार उन्हें परमात्मा का आदेश होता है, वे उसी अनुसार काम करते हैं। यह परमात्मा की सर्वशक्तिमानता और सर्वव्यापीता को दर्शाता है कि उनकी मर्ज़ी के बिना कुछ भी नहीं होता।
- परमात्मा की खुशी और गहरी सोच: “वेखै विगसै करि वीचारु” का अर्थ है कि परमात्मा अपनी सृष्टि को देखकर आनंदित होता है और उन पर गहरी सोच करता है। वह केवल देखता ही नहीं, बल्कि उसकी नजर में जो कुछ आता है, उस पर ध्यान और विचार भी करता है। परमात्मा अपने बनाए हुए सृष्टि की हर गतिविधि और परिस्थिति में गहरी रुचि रखता है, जिससे यह पता चलता है कि उसके प्रति उसका प्यार और दया का भाव हमेशा बना रहता है।
- अवर्णनीयता और कठिनाई: “नानक कथना करड़ा सारु” का मतलब है कि नानक कहते हैं, इस सत्य को बयान करना अत्यंत कठिन है। यह शबद यह समझाने की कोशिश करता है कि परमात्मा की महिमा, सृष्टि की असीमता और हर एक जीव की गतिविधि को बयान करना न केवल असंभव है, बल्कि उसकी गहराई को समझना भी बहुत कठिन है।
संदेश:
यह शबद हमें बताता है कि परमात्मा की सृष्टि अनंत, असीम, और रहस्यमयी है। हर ब्रह्मांड, हर लोक और हर जीव उनके आदेश से संचालित होता है, और यह सारी प्रक्रिया परमात्मा की दृष्टि में है। वह अपनी सृष्टि को देखकर प्रसन्न होते हैं, लेकिन इसे समझना और बयान करना कठिन है। नानक देव जी हमें इस असीमता को विनम्रता से स्वीकार करने का संदेश देते हैं।
सारांश:
“तिथै खंड मंडल वरभंड” से लेकर “नानक कथना करड़ा सारु” तक का संदेश है कि परमात्मा के सचखंड में अनगिनत ब्रह्मांड और लोक मौजूद हैं, और हर चीज़ उनकी मर्ज़ी से होती है। वह अपनी सृष्टि को देखता और विचार करता है। इसे बयान करना कठिन है क्योंकि यह सत्य अनंत और गहन है।