तिथै घड़ीऐ सुरति मति मनि बुधि ॥ तिथै घड़ीऐ सुरा सिधा की सुधि ॥

तिथै घड़ीऐ सुरति मति मनि बुधि ॥ तिथै घड़ीऐ सुरा सिधा की सुधि ॥

 

वहाँ (ज्ञान के क्षेत्र में) सुरति (आध्यात्मिक जागरूकता), मति (सही विचार), मनि (मन), और बुद्धि (बुद्धिमानी) को गढ़ा जाता है।
वहाँ आत्मिक योद्धाओं (सुराओं) और सिद्ध पुरुषों की समझ और सच्ची जागरूकता का निर्माण होता है।

गहरा विश्लेषण:

  1. सुरति, मति, मनि, और बुधि: “तिथै घड़ीऐ सुरति मति मनि बुधि” का अर्थ है कि उस आध्यात्मिक क्षेत्र (ज्ञान खंड) में आत्मा की जागरूकता, सही विचारधारा, मन की शांति, और बुद्धि का निर्माण किया जाता है। यह वह स्थान है जहाँ आत्मा को गहरे ज्ञान और विचारशीलता से परिपूर्ण किया जाता है। यहाँ व्यक्ति को आध्यात्मिक जागरूकता (सुरति) मिलती है, जिससे वह सही दिशा में सोचता (मति) और समझता (बुद्धि) है।
  2. सुराओं और सिद्धों की समझ: “तिथै घड़ीऐ सुरा सिधा की सुधि” का अर्थ है कि वहाँ आत्मिक योद्धाओं (सुराओं) और सिद्ध पुरुषों की सच्ची समझ और ज्ञान का भी निर्माण होता है। ये “सुर” और “सिद्ध” वे लोग होते हैं जिन्होंने अपने जीवन में अत्यधिक आत्मिक साधना और शक्ति अर्जित की होती है। इस चरण में, उनकी समझ और जागरूकता को गढ़ा और परिपक्व किया जाता है, ताकि वे और भी अधिक आत्मिक ऊँचाइयाँ प्राप्त कर सकें।

संदेश:

यह शबद हमें यह बताता है कि ज्ञान के इस आध्यात्मिक क्षेत्र में व्यक्ति की आत्मिक जागरूकता, मन, बुद्धि, और सोचने की शक्ति को विकसित किया जाता है। साथ ही, आत्मिक योद्धाओं और सिद्ध पुरुषों की समझ भी इस क्षेत्र में गढ़ी जाती है। यह क्षेत्र गहरे आत्मिक विकास और सही विचारधारा के निर्माण का प्रतीक है।

सारांश:

“तिथै घड़ीऐ सुरति मति मनि बुधि” से लेकर “तिथै घड़ीऐ सुरा सिधा की सुधि” तक का संदेश यह है कि ज्ञान के आध्यात्मिक क्षेत्र में आत्मा की जागरूकता, सही विचार, और बुद्धिमानी का निर्माण होता है। इस क्षेत्र में आत्मिक योद्धाओं और सिद्ध पुरुषों की समझ को भी विकसित किया जाता है। यह अवस्था आत्मा को उच्चतम आत्मिक ज्ञान और सच्ची जागरूकता तक पहुँचाने का प्रतीक है।

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