नानक नदरी पाईऐ कूड़ी कूड़ै ठीस ॥
नानक कहते हैं, ईश्वर की कृपा से (नज़र से) ही सब कुछ प्राप्त होता है। परंतु झूठ (माया) में फंसे रहने से केवल असत्य (धोखा) ही प्राप्त होता है।
गहरा विश्लेषण:
- ईश्वर की कृपा: “नानक नदरी पाईऐ” का अर्थ है कि सब कुछ ईश्वर की नज़र (कृपा) पर निर्भर है। सिख धर्म में “नदर” (कृपा) को बहुत महत्व दिया जाता है। ईश्वर की कृपा और नज़र ही वह माध्यम है जिससे इंसान को सच्ची प्राप्ति होती है, चाहे वह आध्यात्मिक ज्ञान हो या मोक्ष। बिना ईश्वर की कृपा के जीवन में सच्चाई, शांति, और मुक्ति प्राप्त नहीं हो सकती।
- माया का प्रभाव: “कूड़ी कूड़ै ठीस” का मतलब है कि जो लोग झूठ और माया (सांसारिक भोग, लालच और झूठी इच्छाओं) में फंसे रहते हैं, उन्हें केवल धोखा ही मिलता है। “कूड़ी” का अर्थ है झूठ, और यह संसार की अस्थायी चीज़ों की ओर संकेत करता है। यह पंक्ति बताती है कि जो लोग माया के प्रभाव में जीते हैं, उन्हें अंततः असत्य और निराशा ही हाथ लगती है।
- सत्य और असत्य का फर्क: यह पंक्ति हमें सिखाती है कि ईश्वर की कृपा से ही सच्चाई का अनुभव किया जा सकता है। जो लोग सच्चाई (ईश्वर) की ओर ध्यान नहीं देते और केवल सांसारिक माया में लिप्त रहते हैं, वे अपने जीवन में केवल झूठे परिणाम ही पाते हैं।
सारांश:
“नानक नदरी पाईऐ कूड़ी कूड़ै ठीस” का संदेश यह है कि ईश्वर की कृपा से ही इंसान को सच्चाई, ज्ञान और मोक्ष प्राप्त होता है। लेकिन जो लोग माया (सांसारिक धोखे) में फंसे रहते हैं, उन्हें केवल असत्य और धोखा मिलता है।