आई पंथी सगल जमाती मनि जीतै जगु जीतु…

आई पंथी सगल जमाती मनि जीतै जगु जीतु ॥
आदेसु तिसै आदेसु ॥ आदि अनीलु अनादि अनाहति जुगु जुगु एको वेसु ॥

 

सच्चे पंथ (मार्ग) पर चलने वाले सभी लोग एक परिवार के सदस्य हैं। जिसने अपने मन को जीत लिया, उसने संसार पर विजय प्राप्त कर ली।
आदेश है, उस (ईश्वर) को आदेश,
जो आदि (प्रारंभ से), अनील (निर्मल), अनादि (जिसका कोई आदि नहीं है), और अनाहत (जिसे कोई चोट या घाव नहीं पहुंच सकता) है।
वह युगों-युगों से एक ही रूप में है।

गहरा विश्लेषण:

1. सभी जीव समान हैं:

“आई पंथी सगल जमाती” में यह बताया गया है कि सच्चे मार्ग पर चलने वाले सभी लोग एक ही परिवार के सदस्य हैं। इसका मतलब यह है कि सच्चाई और धर्म के रास्ते पर चलने वाले सभी लोग भाई-बहन समान हैं, चाहे उनका धर्म, जाति या सामाजिक स्थिति कुछ भी हो। गुरु नानक देव जी का यह संदेश संपूर्ण मानवता को एकजुट करने के लिए है, जिसमें सभी लोग बराबर हैं और किसी में कोई भेदभाव नहीं है।

2. मन पर विजय:

“मनि जीतै जगु जीतु” का अर्थ है कि जिसने अपने मन पर विजय प्राप्त कर ली, उसने पूरे संसार को जीत लिया। यह पंक्ति हमें यह सिखाती है कि बाहरी संसार में जीत हासिल करने से ज्यादा महत्वपूर्ण है अपने भीतर की कमजोरियों, इच्छाओं और मोह-माया पर काबू पाना। मन पर विजय पाने से व्यक्ति को सच्ची शांति और मुक्ति मिलती है, और वह दुनिया के भौतिक आकर्षणों से मुक्त हो जाता है।

3. आदेसु तिसै आदेसु:

यह पंक्ति एक बार-बार दोहराई गई वंदना (प्रणाम) है, जिसमें गुरु नानक देव जी ईश्वर की महानता को स्वीकारते हैं। इसका अर्थ है कि “आदेश है, उस (ईश्वर) को आदेश,” यानी हम ईश्वर को नमन करते हैं, जो अनंत है और जिसने इस सृष्टि की रचना की है। यह पंक्ति इस बात की ओर संकेत करती है कि ईश्वर सर्वशक्तिमान और सर्वव्यापी है, और हमें उसकी आज्ञा में रहना चाहिए।

4. ईश्वर के गुण:

  • आदि: ईश्वर आदि (प्रारंभ से पहले) है, जिसका कोई आरंभ नहीं है। वह सृष्टि के निर्माण से पहले भी मौजूद था और सृष्टि के अंत के बाद भी रहेगा।
  • अनील: इसका अर्थ है निर्मल, यानी ईश्वर पवित्र और शुद्ध है। उसमें कोई दोष, पाप या अशुद्धता नहीं है। वह सभी अशुद्धियों और सांसारिक बंधनों से परे है।
  • अनादि: ईश्वर अनादि है, जिसका कोई आरंभ नहीं है। वह समय के बंधन में नहीं बंधा हुआ है। वह सदा से है और सदा रहेगा।
  • अनाहत: अनाहत का अर्थ है जिसे कोई चोट या घाव नहीं पहुंच सकता। यह दर्शाता है कि ईश्वर किसी भी प्रकार के सांसारिक या भौतिक कष्टों से अछूता है। वह अद्वितीय और अभेद्य है।

5. युग-युगांतर से एक ही रूप:

“जुगु जुगु एको वेसु” का अर्थ है कि युगों-युगों से ईश्वर एक ही रूप में है। इसका मतलब है कि ईश्वर का रूप, उसकी सत्ता और उसका अस्तित्व कभी नहीं बदलता। वह समय और स्थान से परे है और सदा एक समान रहता है। यह पंक्ति हमें यह सिखाती है कि ईश्वर शाश्वत है और उसकी सत्ता हर काल और युग में स्थिर है।

सारांश:

“आई पंथी सगल जमाती मनि जीतै जगु जीतु ॥
आदेसु तिसै आदेसु ॥
आदि अनीलु अनादि अनाहति जुगु जुगु एको वेसु ॥”
का संदेश यह है कि सच्चे मार्ग पर चलने वाले सभी लोग एक समान हैं, और जिसने अपने मन पर विजय प्राप्त कर ली, उसने संसार पर विजय प्राप्त कर ली। ईश्वर सर्वशक्तिमान, शाश्वत, निर्मल और अनादि है। वह युगों-युगों से एक ही रूप में है, और हमें उसकी महानता को स्वीकार कर उसकी आज्ञा में जीवन जीना चाहिए।

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