तीरथि नावा जे तिसु भावा विणु भाणे कि नाइ करी ॥
जेती सिरठि उपाई वेखा विणु करमा कि मिलै लई ॥
अर्थ: अगर भगवान की इच्छा हो, तो तीर्थ पर स्नान करने का फल मिलता है। उनकी मर्जी के बिना, स्नान का कोई लाभ नहीं। जितनी भी सृष्टि देखता हूँ, सब कर्मों पर निर्भर है। कर्मों के बिना कुछ प्राप्त नहीं होता।
विभिन्न संदर्भों में इन पंक्तियों का विश्लेषण:
करियर और आर्थिक स्थिरता
करियर और आर्थिक स्थिरता के संदर्भ में, यह पंक्तियाँ सिखाती हैं कि सफलता भगवान की कृपा और हमारे कर्मों पर निर्भर है। केवल भाग्य या परिस्थिति का ही भरोसा करना पर्याप्त नहीं है; हमें ईमानदारी और मेहनत से काम करना चाहिए। उदाहरण के लिए, एक व्यक्ति जो अपने करियर में उन्नति चाहता है, उसे कठिन परिश्रम करना होगा और सही दिशा में प्रयास करने होंगे। भगवान की कृपा से ही उसे सफलता प्राप्त होगी।