नानक जी 16x
वेईं विच चुभी मारके
छेड़ी एक ओंकार दी
वेईं विच चुभी मारके
छेड़ी एक ओंकार दी
उरवार नु तुस्सी दे गए
गल श्रीस्त्रियाँ दे पार दी
नानक जी नानक जी 4x

सी जगत जननी
रो रही दिते दिलासे
सी जगत जननी
रो रही दिते दिलासे अन के
तुस्सा साजन ठग वि तारिया
गल लाया अपने जान के

पीरां दे भरम निवार के ]
आया दूध ते कलियाँ तार के
हर एक न ओहि मिल गया 2x
सी लोड जिस ऊपर दी
नानक जी नानक जी 4x

तुस्सी सिखियाँ विच गृहस्त दे
नाल एक दा लेना
आकषण तो ऊँचे हो वि
मिटटी बांके रहना

दुःख सुख जो वि दात मिले
बस मीठा मीठा कहना
हल चलाऊन्डेय किरात दा 2x
करूपी सच्चे करतार दी
नानक जी नानक जी 4x

Scroll to Top