सोई सोई सदा सचु साहिबु साचा साची नाई …

सोई सोई सदा सचु साहिबु साचा साची नाई ॥
है भी होसी जाइ न जासी रचना जिनि रचाई ॥

 

वही एक सच्चा ईश्वर हमेशा से है, सदा रहेगा, और उसका नाम भी सदा सत्य है।
वह अब भी है, आगे भी रहेगा, और उसकी बनाई हुई यह सृष्टि नष्ट हो जाएगी, परंतु वह स्वयं कभी नष्ट नहीं होगा।

गहरा विश्लेषण:

1. ईश्वर की सत्यता और अनंतता:

“सोई सोई सदा सचु साहिबु साचा साची नाई” का अर्थ है कि ईश्वर हमेशा से सत्य है और उसका नाम भी सदा सत्य है। यह बात हमें यह समझाती है कि सृष्टि में कुछ भी अस्थायी हो सकता है, लेकिन ईश्वर का अस्तित्व, उनकी सच्चाई और उनका नाम अनंत है। वे समय और परिवर्तन से परे हैं। उनकी सत्यता किसी भी स्थिति या समय से प्रभावित नहीं होती। यह विचार यह बताता है कि दुनिया के सभी चीज़ें बदल सकती हैं, लेकिन ईश्वर की सच्चाई शाश्वत है।

2. वर्तमान और भविष्य में ईश्वर का अस्तित्व:

“है भी होसी जाइ न जासी” का अर्थ है कि ईश्वर अब भी है, और आगे भी रहेगा, कभी नहीं जाएगा। यह पंक्ति बताती है कि ईश्वर केवल वर्तमान में नहीं है, बल्कि भविष्य में भी रहेगा। उनका अस्तित्व किसी भी कालखंड या समय से परे है। वह अतीत, वर्तमान और भविष्य में हमेशा एक समान हैं, और उनके अस्तित्व को कोई समाप्त नहीं कर सकता। इसका संदेश यह है कि सृष्टि का हर कण ईश्वर की योजना का हिस्सा है, और वह सदा के लिए विद्यमान हैं।

3. सृष्टि का नाश और ईश्वर की स्थिरता:

“रचना जिनि रचाई” का अर्थ है कि ईश्वर ने इस सृष्टि की रचना की है। यहाँ यह स्पष्ट किया गया है कि ईश्वर ने यह संसार रचा, और यह संसार नश्वर है—यह एक दिन नष्ट हो जाएगा। लेकिन वह ईश्वर जिसने इस सृष्टि की रचना की है, वह कभी समाप्त नहीं होगा। यह विचार हमें यह सिखाता है कि भौतिक संसार अस्थायी है, परंतु उसकी रचना करने वाला ईश्वर स्थायी है।

4. नश्वर संसार और अमर ईश्वर:

यह शबद हमें यह याद दिलाता है कि दुनिया में हर चीज़, चाहे वह कितनी भी स्थिर या स्थायी प्रतीत होती हो, वह अस्थायी है। ईश्वर की बनाई सृष्टि समय के साथ बदलती रहती है, परंतु ईश्वर का अस्तित्व, उनका सत्य और उनका नाम समय के परे है। यह हमें विनम्रता और सच्ची भक्ति के मार्ग पर चलने का मार्गदर्शन करता है, क्योंकि संसार में केवल ईश्वर ही अनंत और शाश्वत हैं।

5. नाम की महत्ता:

यहाँ “साची नाई” का भी गहरा अर्थ है। “नाई” का मतलब है “नाम”। ईश्वर का नाम भी उतना ही सत्य और शाश्वत है जितना स्वयं ईश्वर। नाम जपने की परंपरा, जो सिख धर्म का महत्वपूर्ण हिस्सा है, इसी सत्य पर आधारित है कि ईश्वर का नाम उनके साथ ही अनंत है। ईश्वर का नाम जपते हुए व्यक्ति सच्चाई के मार्ग पर चलता है और इस अस्थायी दुनिया में शाश्वत सत्य को प्राप्त करने की कोशिश करता है।

सारांश:

“सोई सोई सदा सचु साहिबु साचा साची नाई ॥
है भी होसी जाइ न जासी रचना जिनि रचाई ॥”
का संदेश यह है कि ईश्वर सदा सत्य है, उनका नाम सदा सत्य है, और उनका अस्तित्व काल के परे है। यह संसार, जो उन्होंने रचा है, नश्वर है और एक दिन नष्ट हो जाएगा, परंतु ईश्वर कभी नष्ट नहीं होंगे। यह शबद हमें इस सत्य का बोध कराता है कि केवल ईश्वर ही स्थायी हैं, और हमें उनकी शरण में रहना चाहिए।

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