सरम खंड की बाणी रूपु ॥ तिथै घाड़ति घड़ीऐ बहुतु अनूपु ॥
सरम खंड (श्रम क्षेत्र) की बाणी (वाणी) सुंदर और अद्वितीय रूप से प्रकट होती है।
वहाँ अनगिनत सुंदर और अनुपम रूप गढ़े जाते हैं।
गहरा विश्लेषण:
- सरम खंड: “सरम खंड” का अर्थ है श्रम का क्षेत्र या वह अवस्था जहाँ आध्यात्मिक रूप से आत्मा को परिष्कृत किया जाता है। इस चरण में आत्मा अपनी असली सुंदरता और रूप प्राप्त करती है। यह कर्म, तपस्या, और ध्यान का वह स्तर है, जहाँ आत्मा की आंतरिक सुंदरता को गढ़ा और निखारा जाता है।
- बाणी रूपु: “बाणी रूपु” का तात्पर्य है कि इस क्षेत्र की वाणी सुंदरता का प्रतीक है। यहाँ वाणी का अर्थ केवल शब्द नहीं, बल्कि आत्मा की आंतरिक सुंदरता है, जो तपस्या और श्रम के द्वारा विकसित होती है। यह सुंदरता आत्मा की आंतरिक पवित्रता और शुद्धता को दर्शाती है।
- अनुपम रूप: “तिथै घाड़ति घड़ीऐ बहुतु अनूपु” का अर्थ है कि उस क्षेत्र में अनगिनत सुंदर और अद्वितीय रूप बनाए जाते हैं। यह उस रचनात्मकता और आत्मिक विकास को दर्शाता है, जो इस चरण में होता है। आत्मा को विभिन्न प्रकार के सुंदर और अनूठे रूपों में गढ़ा जाता है, जो हर आत्मा की विशिष्टता और अनूठी पहचान को प्रकट करता है।
संदेश:
यह शबद हमें सिखाता है कि सरम खंड (श्रम और तपस्या का क्षेत्र) में आत्मा की आंतरिक सुंदरता प्रकट होती है। यह चरण आत्मा को परिष्कृत करता है और उसकी विशेषता को अद्वितीय रूप से गढ़ता है। इस क्षेत्र में आत्मा का विकास होता है, और यह उसके आंतरिक गुणों और रूपों को निखारता है। यह अनुपम रूप और सुंदरता ईश्वर के दिव्य प्रेम और कृपा से प्रकट होती है।
सारांश:
“सरम खंड की बाणी रूपु” से लेकर “तिथै घाड़ति घड़ीऐ बहुतु अनूपु” तक का संदेश यह है कि सरम खंड में आत्मा की आंतरिक सुंदरता और गुण प्रकट होते हैं। यहाँ आत्मा को तपस्या और श्रम द्वारा विभिन्न सुंदर और अद्वितीय रूपों में गढ़ा जाता है। यह क्षेत्र आत्मा के विकास और उसकी दिव्यता का प्रतीक है, जहाँ वह अपने सच्चे रूप में निखरती है।