जपि मन गोबिद माधो ॥ हरि हरि अगम अगाधो ॥
मति गुरमति हरि प्रभु लाधो ॥ धुरि हो हो लिखे लिलाधो ॥
विश्व मे ऐसे बहुत से महान व्यक्ति हुए है जो कभी स्कूल गए ही नहीं और गए भी तो परीक्षा में असफ़ल होकर बाहर आये।
ये थोड़ा विचित्र सा लगता है जो कभी स्कूल में सफल न होने वाले व्यक्ति कैसे सफल हो जाते है इसका सीधा सा अर्थ है “लगन”उन लोगो मे एक ही लक्ष्य को प्राप्त करने की ऐसी लगन हो जाती है सब कुछ छोड़ कर उसी लक्ष्य पे अग्रसर होते है ।
ऐसे ही एक उदहारण है भारत के महान गणितज्ञ रामानुजन।वह एक सामान्य परिवार से थे।इसी कारणवश इनकी प्रारम्भिक शिक्षा ठीक प्रकार से नही हो पाई।लेकिन गणित विषय मे इनकी गहन रुचि थी कि गणित विषय के अलावा उन्हें और विषयो में कुछ समझ नही आता था।
परिणाम स्वरूप पे स्कूल में फेल हो गए और पढ़ाई छोड़ दी।
एक बार गणित के मास्टर कक्षा में छात्रों को भाग विधि सीखा रहे थे।
मास्टर जी ने पूछा यदि 3 केले बाँट दिए जाएं तो प्रत्येक को कितने केले मिलेंगे? एक छात्र ने जवाब दिया-1।
बिल्कुल सही ।ऐसे ही यदि 1000 केले 1000 लोगो के बाँट दिये जायें तब क्या उत्तर आएगा-1।
तभी रामानुजन ने ने एम सवाल किया यदि 0 केला यदि 0को बाँटा जाए क्या तब भी 1 केला ही मिलेगा?
सब छात्र उनके पूछे गए सवाल पे हसने लगे ।
लेकिन मास्टर जी अवाक रह गए।बस इसी बात को सिद्ध करने के लिए सेकड़ो वर्ष लग गए।ये समझने के लिए के
0/0=infinite होता है।
ऐसे थे हमारे रामानुजन