राती रुती थिती वार ॥ पवण पाणी अगनी पाताल…

राती रुती थिती वार ॥ पवण पाणी अगनी पाताल ॥
तिसु विचि धरती थापि रखी धरम साल ॥
तिसु विचि जीअ जुगति के रंग ॥ तिन के नाम अनेक अनंत ॥

 

 

रातें, ऋतुएं, तिथियाँ और दिन (सप्ताह) — सब उसकी रचना हैं।
हवा, पानी, अग्नि और पाताल (धरती के नीचे की दुनिया) — ये सब भी उसकी रचना हैं।
उसने इस धरती को धर्म का स्थान बनाकर स्थिर रखा है।
उसमें अनगिनत जीव अनेक तरीकों और रंगों में रहते हैं।
उनके नाम अनगिनत और असीम हैं।

गहरा विश्लेषण:

  1. समय और प्रकृति: “राती रुती थिती वार” का अर्थ है कि दिन, रात, मौसम, तिथियाँ और वार (सप्ताह के दिन) — ये सभी ईश्वर की बनाई हुई व्यवस्थाएँ हैं। ये समय और काल के संकेतक हैं, और यह दर्शाते हैं कि सृष्टि का हर पहलू ईश्वर की योजना और रचना के अनुसार चलता है।
  2. प्राकृतिक तत्वों की रचना: “पवण पाणी अगनी पाताल” — हवा, पानी, अग्नि, और धरती के नीचे की दुनिया, ये सभी शक्तिशाली तत्व सृष्टि के आधार हैं। ये बताता है कि ईश्वर ने इस संसार के हर तत्व को अपनी योजना के अनुसार रचा है, और इन तत्वों के बिना जीवन संभव नहीं है।
  3. धरती को धर्म का स्थान बनाना: “तिसु विचि धरती थापि रखी धरम साल” — ईश्वर ने इस धरती को “धर्म का स्थान” बना कर स्थापित किया है, जिसका अर्थ यह है कि यह धरती एक ऐसा स्थान है जहाँ जीवन के लिए नैतिकता, धर्म, और सत्य का पालन आवश्यक है। धरती पर मनुष्यों का उद्देश्य केवल भौतिक सुख नहीं है, बल्कि यहाँ नैतिकता और धर्म का पालन करना जीवन का असली लक्ष्य है।
  4. जीवों की विविधता: “तिसु विचि जीअ जुगति के रंग” — धरती पर अनगिनत प्रकार के जीव रहते हैं, जो विभिन्न रूपों, रंगों और तरीकों से जीवन जीते हैं। यह विविधता भी ईश्वर की अद्भुत रचना का प्रतीक है, जहाँ हर जीव अपने ढंग से जीवन जी रहा है।
  5. असीमित नाम: “तिन के नाम अनेक अनंत” का अर्थ है कि इन जीवों के नाम अनगिनत हैं। उनकी विशेषताएँ, उनकी जीवनशैली और उनके कार्य इतने विविध हैं कि उनके नामों की कोई सीमा नहीं है। यह सृष्टि की विशालता और ईश्वर की असीम रचना शक्ति को दर्शाता है।

संदेश:

यह शबद हमें सिखाता है कि सृष्टि का हर पहलू—समय, तत्व, धरती, जीव—सब कुछ ईश्वर की महान रचना का हिस्सा है। धरती एक ऐसा स्थान है जहाँ धर्म और नैतिकता का पालन आवश्यक है, और यहाँ रहने वाले जीव अनगिनत रूपों और नामों में आते हैं। ईश्वर की रचना की विविधता और विशालता अनंत है, और हमें इस रचना में धर्म और सत्य का पालन करते हुए जीना चाहिए।

सारांश:

“राती रुती थिती वार” से लेकर “तिन के नाम अनेक अनंत” तक का संदेश यह है कि सृष्टि का हर तत्व, हर जीव, और समय की हर स्थिति ईश्वर की महान रचना का हिस्सा है। धरती एक पवित्र स्थान है जहाँ धर्म का पालन अनिवार्य है, और यहाँ रहने वाले जीवों की विविधता ईश्वर की असीम रचना क्षमता को दर्शाती है।

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