धरम खंड का एहो धरमु ॥ गिआन खंड का आखहु करमु ॥
धर्म खंड (धर्म के क्षेत्र) का यही धर्म है।
अब ज्ञान खंड (ज्ञान के क्षेत्र) के कर्मों की बात बताओ।
गहरा विश्लेषण:
- धर्म खंड: “धरम खंड का एहो धरमु” का मतलब है कि धर्म के क्षेत्र में यही नियम है कि हर व्यक्ति अपने कर्मों के आधार पर न्याय पाता है। इस संसार में धर्म का मुख्य उद्देश्य यही है कि व्यक्ति सच्चे और धर्मपूर्ण कर्म करे। धर्म खंड को कर्मों और धर्म के पालन के रूप में देखा जाता है, जहाँ प्रत्येक व्यक्ति के जीवन के आचरण और उसके कार्यों के आधार पर न्याय किया जाता है।
- ज्ञान खंड: “गिआन खंड का आखहु करमु” का अर्थ है कि अब ज्ञान के क्षेत्र में प्रवेश करते हैं, जहाँ कर्मों से आगे बढ़कर ज्ञान की महत्ता है। यहाँ “करमु” का संदर्भ यह है कि ज्ञान खंड में मनुष्य अपने कर्मों के माध्यम से आध्यात्मिक ज्ञान प्राप्त करता है। यह वह स्तर है जहाँ व्यक्ति केवल कर्मों से संतुष्ट नहीं होता, बल्कि जीवन और सृष्टि के गहरे रहस्यों को समझने के लिए ज्ञान की खोज करता है।
धर्म और ज्ञान का संबंध:
- धर्म खंड में व्यक्ति अपने कर्मों पर ध्यान केंद्रित करता है। धर्म का पालन, सही और गलत का निर्णय, और जीवन में नैतिकता का पालन, यह सब इस क्षेत्र का हिस्सा हैं।
- ज्ञान खंड में व्यक्ति कर्मों के पार जाकर सृष्टि, आत्मा, और परमात्मा के गहरे ज्ञान की ओर बढ़ता है। यहाँ कर्मों का उद्देश्य केवल अच्छे कार्य करना नहीं है, बल्कि अपने अस्तित्व के उच्च उद्देश्य को समझना और सत्य का ज्ञान प्राप्त करना है।
संदेश:
यह शबद हमें यह सिखाता है कि धर्म का पहला स्तर कर्मों पर आधारित है, जहाँ व्यक्ति अपने आचरण के अनुसार न्याय प्राप्त करता है। लेकिन इससे आगे ज्ञान का स्तर आता है, जहाँ व्यक्ति कर्मों से आगे बढ़कर सत्य और ज्ञान की खोज में लग जाता है।
सारांश:
“धरम खंड का एहो धरमु” से लेकर “गिआन खंड का आखहु करमु” तक का संदेश यह है कि धर्म खंड में धर्म का पालन और कर्मों का न्याय महत्वपूर्ण है, जबकि ज्ञान खंड में व्यक्ति ज्ञान की खोज और सृष्टि के रहस्यों को समझने के लिए अपने कर्मों का उपयोग करता है। यह जीवन की एक गहरी यात्रा का प्रतीक है, जहाँ कर्म और ज्ञान दोनों की महत्ता है।