दो वरदान

मेरे मन हरि हरि राम नामु जपि चीति ॥
हरि हरि वसतु माइआ गड़्हि वेड़्ही गुर कै सबदि लीओ गड़ु जीति ॥

एक बार महात्मा अपने शिष्यों के साथ तीर्थ-यात्रा के लिए जा रहे थे। चलते-चलते रास्ते में एक गांव आया, महात्मा ने कहा आज का विश्राम इसी गांव में करते है ,यह कह कर शिष्यो सहित उस गांव में चले गए।

गांव के लोगो ने महात्मा को देखा तो बड़े प्रसन्न हुए और महात्मा के लिए बहुत अच्छा आसन लगाया सभी अपने-अपने घरों से अच्छा-अच्छा पकवान बना कर लाए रात होने पर सभी बच्चे, बड़े, स्त्रियां महात्माओं के पैर दबाने लगे और आराम से बैठ कर ज्ञान की बाते सुनते रहे।

सुबह हुई तो महात्मा ने गांव वालो से कहा अच्छा अब हम चलते है। आप सभी हम जाने की अनुमति दे। गांव वालो ने कहा महाराज एक दिन तो और रुकिए लेकिन महात्मा ने कहा नहीं बच्चो अब हम जाते है। कभी फिर आयेंगे, यह कह कर महात्मा चलने लगे और चलते हुए महात्मा ने गांव वालो को वरदान दिया और कहा सब के सब उजड़ जाओ, यह वरदान देकर महात्मा चले जाते है।

चलते चलते श्याम हुई तो महात्मा एक दूसरे गांव में पहुंचे। वहा पहुंचते ही बच्चो का बड़ा सा झुंड दौड़ा आया और महात्माओं को चारों तरफ से घेर कर कोई मिट्टी फेंकता है तो कोई कीचड़ फेकता है। सौर मचाने लगे, महात्मा लोग बड़ी मुस्किल से उनसे पूछा छुड़ा कर एक जगह गए और जो अपने पास फटा पुराना कंबल था बिछा कर बैठ गए।

काफी देर बाद गांव के कुछ बड़े व बूढ़े आए वे सब भी महात्माओं को देख कर हंसने लगे और मजाक उड़ाने लगे एक जवान ने तो महात्माओं का कंबल ही छीन लिया और कहा इनके क्या काम आएगा कम से कम मेरी भैंस तो ओडेगी। वे महात्माओं का अपमान करते हुए चल गए।

महात्माओं ने भूखे – प्यासे रहते हुए बड़ी मुस्किल से रात बिताई सुबह होते ही महात्मा चलने लगे और चलते हुए महात्मा ने गांव को वरदान दिया की सब के सब बसे रहो।

गांव से काफी दूर जाने के बाद जंगल में एक तालाब आया और कुछ फल के पेड़ नजर आए तो महात्मा ने कहा बच्चो यहा थोड़ी देर विश्राम करते है। वहा महात्मा लोग फल खाते है और तालाब का शीतल जल पीते है। तब एक शिष्य ने कहा महात्मा क्षमा करे हमे एक बात खटक रही है आप नाराज न हो तो हम पूछ सकते है।तब महात्मा ने कहा बोलो बच्चो क्या जानना चाहते हो।

शिष्य ने कहा महात्मा जिस गांव में हमारी अच्छी सेवा हुई वहा के कितने अच्छे लोग थे उन लोगों को तो आपने वरदान दिया की उजड़ जाओ और जिस गांव में हमारा अपमान हुआ उन लोगों को आपने वरदान दिया की बसे रहो ऐसा क्यों महाराज?

तब महात्मा बोले देखो बच्चो पहले गांव में कितने अच्छे विचारों के आदमी थे। वह आदमी उजड़ जायेंगे तो दुनिया के कोने – कोने में फैल जायेंगे और जहां भी जायेंगे सभी को अच्छे विचार सिखाएंगे इस लिए मैंने उनको उजड़ जाने का वरदान दिया।

और जो दूसरा गांव था वहा के लोग पापी व बेवकूफ थे, वे जहां भी जायेंगे तो अन्य लोगों को पाप व अन्याय करना ही सिखाएंगे इसलिए उनका एक जगह ही टिका रहना ठीक है इसी कारण मैंने उनको वरदान दिया की बसे रहो।

 

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