जीवन की परिस्थितियां

कबीर भांग माछुली सुरा पानि जो जो प्रानी खांहि ॥

तीरथ बरत नेम कीए ते सभै रसातलि जांहि ॥

 

मेरा बेटा मुझे बृद्ध आश्रम छोड़, आज तक लेने नहीं आया। यह सोच बुढ़ी अम्मा रोने लगती हैं ।

मेरे पति के देहांत के बाद, मेरा बेटा किशोर ही मेरे एक मात्र सहारा था। उनके देहांत के बाद किशोर ने ही घर कि सारी जिम्मेवारी उठाया । हम दोनो अपने एक दूसरे के साथ खुशी खुशी रहते थे। मैंने ने कहा,” किशोर अब तुम्हे शादी कर लेनी चाहिए क्युकी मेरी जिंदगी का कोई भरोसा नहीं है,आज हु कल रहूगी की नहीं पता नहीं इसलिए मेरे जिंदगी रहते ही शादी कर लो।

मेरी बाद सुन किशोर कहता,”अभी तुम कही नहीं जा रही हो माँ तुम्हें तो अभी मेरे बच्चों को खेलाना है और उसकी शादी भी तो देखना है और तुम माँ अभी ही मरने की बात कर रही हो। हस्ते हुए यह बोल कर किशोर ऑफिस चला जाता है।

फिर मैंने भी उसको शादी केलिए दवाब नहीं डाला, मैंने सोचा जब मन होगा खुद कर लेगा। जब वह ऑफिस से घर आया तो उसके चेहरे पर पहले जैसी मुस्कान नहीं थी। मैंने पूछा,”क्या?? कोई परेशानी है बेटा तो मुझे बताओ।

वो कहता है ऐसी कोई बात नहीं है -माँ, ऑफिस मे थोड़ा काम का प्रेशर है जिस कारण से परेशान हु ।यह बोल कर अपने कमरे में चला जाता है,जब मै उसके कमरे में खाना लेकर जाती हु वो खाने से मना कर देता है और कहता मैंने ऑफिस में खा लिया,आप जाकर खाना खा लीजिये।

वह अब पहले जैसा ना हसी मजाक करता और ना ही पहले जैसा हम से बात करता है। मैने कई बार उस से पूछा कोई बात है तो मुझे बताओ लेकिन वह हर बार काम का प्रेशर बात बोल मेरी बात को टाल देता ।

एक दिन किशोर मुझ से कहता है,” माँ, मुझे अमेरिका कि एक कंपनी से ऑफर आया और सैलरी भी अच्छी खासी दे रहा है। मै कुछ महीने वहा काम करके फिर मै आप के पास लौट आयुंगा।

जब मैंने उस से कहा,”मै अकेली कैसे रहूंगी। उसने कहा,”जब तक मै नहीं आ जाता तब तक आप बृद्ध आश्रम में ही रहना और यह कह कर मुझे बृद्ध आश्रम छोड़ देता है और कहता अगर आप को कोई चीज की कभी जरूर हो तो इस नंबर पर कॉल कर लीजिए।यह बोल कर वह विदेश निकल जाता है।

बृद्ध आश्रम में रहते हुए मुझे तीन महीने से ऊपर का समय हो गया लेकिन मेरे बेटा का आज तक मुझें फोन नहीं आया। मै रोज उसके फोन का इंतज़ार करता शायद आज फोन आ जाए और वह मुझे यहां से आ कर ले जायेगा। ऐसा करते हुए पूरे एक साल बीत गए।अब मै भी आशा खो बैठी थी, मेरा बेटा मुझे आ कर ले जाएगा।

एक दिन मेरी तबियत बहुत खराब हो गई और बृद्ध आश्रम के लोगों ने मुझे अपने बेटे को फोन करने के लिए कहने लगी लेकिन जब मैने फोन करने से मना करने लगी तो उन्होंने मेरी बात को काटते हुए मुझ से उसका नंबर मांगा जो मेरे बेटे ने विदेश जाने से पहले मुझे दिया था।

जब आश्रम के लोगों ने फोन किया तो पता चला की वो उसके दोस्त का नंबर है। उसके की बात सुन हम सभी चौक गए क्युकी उसके दोस्त ने बताया कि उसका दोस्त का कुछ महीने पहले हि देहांत हो गया।उसे लास्ट स्टेज कैंसर था और वो नहीं चाहता था कि उसकी बीमारी के बारे में उसकी माँ को पता चले ताकि वह अपनी आगे कि जिंदगी खुशी से जीए और उसके ना रहने पर भी उसका ध्यान रखने वाला हो इसलिए उस ने अपनी माँ को बृद्ध आश्रम में छोड़ दिया।

यह बात सुन बृद्ध आश्रम के सभी लोगों के आँखो मे आंसू बहने लगे और वो लोग कहने हम कितने गलत थे जो उसके बेटे के बारे मे बुरा सोच रहे थे और उन लोगो ने भी वादा किया की उसकी माँ को हम सभी खुश रखेंगे जिस से उसे कभी भी अपने बेटे की याद ना आए।

जीवन की परिस्थितियां हमेशा स्पष्ट नहीं होतीं, और कभी-कभी लोग अपने प्रियजनों की भलाई के लिए कड़े और असहज निर्णय लेते हैं। हमें दूसरों के फैसलों को जल्दबाज़ी में नहीं आंकना चाहिए, क्योंकि हर कहानी के पीछे एक अनकहा सच हो सकता है

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