जिव तिसु भावै तिवै चलावै जिव होवै फुरमाणु…

जिव तिसु भावै तिवै चलावै जिव होवै फुरमाणु ॥
ओहु वेखै ओना नदरि न आवै बहुता एहु विडाणु ॥

जैसा उसे (ईश्वर को) अच्छा लगता है, वह वैसे ही सृष्टि का संचालन करता है, जैसा उसका आदेश होता है।
वह सब कुछ देखता है, लेकिन किसी की दृष्टि में नहीं आता। यह उसकी महान विचित्रता (अद्भुतता) है।

गहरा विश्लेषण:

1. ईश्वर की इच्छा और आदेश:

“जिव तिसु भावै तिवै चलावै” का अर्थ है कि संसार का संचालन ईश्वर की इच्छा के अनुसार होता है। ईश्वर की मर्जी से ही सब कुछ चलता है। इस पंक्ति में यह बताया गया है कि हम जो कुछ भी देख रहे हैं, वह ईश्वर के आदेश और उसकी मर्जी का ही परिणाम है। संसार में हर गतिविधि, हर घटना ईश्वर की योजना और उसकी इच्छा के अनुसार होती है।

“जिव होवै फुरमाणु” का मतलब है कि जैसा ईश्वर का आदेश होता है, वैसे ही सब कुछ होता है। यह पंक्ति स्पष्ट रूप से दर्शाती है कि सृष्टि में ईश्वर का आदेश ही अंतिम और सर्वोपरि है। वह ही सृष्टि का वास्तविक मालिक और नियंत्रक है, और उसकी आज्ञा के बिना कुछ भी नहीं हो सकता।

2. ईश्वर सब देखता है:

“ओहु वेखै ओना नदरि न आवै” का अर्थ है कि ईश्वर सब कुछ देखता है, लेकिन उसे कोई देख नहीं सकता। यह पंक्ति ईश्वर की सर्वव्यापकता की ओर इशारा करती है। वह हर जगह मौजूद है, हर घटना और हर विचार को देखता है, लेकिन उसकी उपस्थिति को प्रत्यक्ष रूप से महसूस करना या देख पाना असंभव है। उसकी दृष्टि में संसार का हर कोना है, परंतु वह किसी भी भौतिक दृष्टि से दिखाई नहीं देता।

3. ईश्वर की विचित्रता और महानता:

“बहुता एहु विडाणु” का अर्थ है कि यह एक महान विचित्रता (अद्भुतता) है। ईश्वर की इस अदृश्यता और उसकी सर्वव्यापकता को समझना हमारी बुद्धि के परे है। यह उसकी महानता का प्रतीक है कि वह सब कुछ करता है, सब कुछ देखता है, लेकिन हमें दिखाई नहीं देता। यह उसकी लीला और चमत्कार का हिस्सा है कि वह अपने कार्यों से अप्रत्यक्ष रहते हुए भी संसार को चला रहा है।

सारांश:

“जिव तिसु भावै तिवै चलावै जिव होवै फुरमाणु ॥
ओहु वेखै ओना नदरि न आवै बहुता एहु विडाणु ॥”
का संदेश यह है कि संसार का संचालन ईश्वर की मर्जी और आदेश से होता है। वह हर चीज़ को देखता है और जानता है, लेकिन उसे कोई देख नहीं सकता। यह उसकी महानता और अद्भुतता है कि वह हर जगह मौजूद होते हुए भी अदृश्य रहता है। ईश्वर की इस लीला को समझ पाना हमारी बुद्धि से परे है।

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