आपे बीना आपे दाना ॥
गहिर ग्मभीरु गहीरु सुजाना ॥
एक आदमी जिसे कायर का बिरुद मिला हुआ था वो अपने आपको साहसी बना लेता है और अपने कायर के बिरुद को हटाता है। वो ये सब कैसे करता है ये जानने के लिए आपको पढ़नी पड़ेगी ये कहानी।
ये कहानी बहुत समय पहले की है। एक गांव में एक आदमी रहता था। उस आदमी की हरकतों की वजह से गांव के लोगो ने उसे कायर का बिरुद दिया हुआ था।
गांव के सभी लोग उसे उसके नाम से नहीं बल्कि कायर कहके ही बुलाते थे। वो आदमी खुद भी इस बिरुद की वजह से काफी परेशान रहता था। इसलिए ही उसने एक दिन तय किया की वो अपने आप को बदलेगा।
उस आदमी ने गांव के एक साधु के बारे में सुन रखा था, वो उस साधु के पास चला गया। उस आदमी ने साधु को अपनी परेशानी सुनाई और उनसे प्रार्थना की कि वो उसे बहादुरी सीखाएं जिससे उसे जो कायर का बिरुद मिला है वो चला जाए।
साधु ने उसकी सारी बात सुनी और उसे कहा कि, मै तुम्हारी मदद जरूर करुगा और तुम्हे बहादुरी और निडरता दोनों ही सिखाऊंगा किन्तु उससे पहले तुम्हें एक काम करना पड़ेगा।
उस आदमी ने कहा, आप जो कहोगे मै वह करूंगा लेकिन मुझे जल्द से जल्द इस कायर बिरुद से छुटकारा पाना है।
साधु ने कहा, तुम्हे एक महीने तक किसी दूसरे गांव में जाकर रहना पड़ेगा और वहां पर आते जाते हर एक व्यक्ति जिस जिससे तुम मिलोगे उन सभी को जोर जोर से कहना पड़ेगा कि तुम कायर हो।
साधु की ये शर्त सुनकर उस आदमी के चेहरे पर घबराहट और चिंता साफ साफ दिख रही थी मगर वह कर भी क्या सकता था, वो अपने घर चला गया।
उस आदमी के कुछ दिन उसी विचार में बीत गए कि मैं यह काम करूं या ना करूं? किन्तु कई दिन सोचने के बाद उस आदमी ने तय किया की पूरी जिंदगी कायर बने रहने से अच्छा है एक महीने तक गुरुजी का कहा मान लिया जाए।
ये करने में शुरू शुरू में तो उसे बहुत परेशानी हुई। उसके मुँह से कोई शब्द ही नहीं निकलता था और वो थरथर कापने लगता था, लेकिन जैसे – जैसे दिन बीतते गए उसके अंदर की घबराहट खत्म होने लगी और उसकी आवाज तेज होने लगी।
अब पहले की तरह उसका शरीर भी नहीं कांपता था और वह किसी भी व्यक्ति की आंखों में आंखें डाल कर जो कहना है कह सकता था।
एक महीना ख़त्म होने पर वह आदमी साधु के पास वापस लौटा और उसने कहा, अब मेरे अंदर की कायरता जा चुकी है, अब मै किसी से नहीं डरता हू और अब में कुछ भी कर सकता हू। उस आदमी ने कहा लेकिन मेरे मन में एक प्रश्न अभी भी है कि ये आपको कैसे लगा की ऐसा काम करने से मैं बहादुर बन जाऊंगा।
साधु ने उस आदमी को समझाया की कोई भी व्यक्ति तभी बहादुर बनता है जब वो अपनी समस्याओं का डटकर सामना करता है, जिनसे उसे सबसे ज्यादा डर लगता है। इसीलए यह काम खत्म करने पर तुम्हारी अंदर की कायरता भी जा चुकी है।
हमें जिससे सबसे ज्यादा डर लगता है उस चीज़ का अगर हम डटकर सामना करे तो हम बहादुर बन सकते है।