असंख कूड़िआर कूड़े फिराहि ॥ असंख मलेछ मलु भखि खाहि ॥

असंख कूड़िआर कूड़े फिराहि ॥ असंख मलेछ मलु भखि खाहि ॥

 

गुरु ग्रंथ साहिब के इस श्लोक में गुरु नानक देव जी ने संसार में मौजूद विभिन्न प्रकार की नकारात्मकताओं और अशुद्धियों का वर्णन किया है। इसका अर्थ इस प्रकार है:

असंख कूड़िआर कूड़े फिराहि
असंख्य लोग झूठ बोलते हैं और झूठे विचारों में फंसते रहते हैं।

असंख मलेछ मलु भखि खाहि
असंख्य लोग गंदगी और अशुद्धियों का सेवन करते हैं, अर्थात् नकारात्मक और बुरे कर्मों में लगे रहते हैं।

जीवन के विभिन्न संदर्भों में अर्थ:

  1. आध्यात्मिक संदर्भ:
    • यह श्लोक हमें याद दिलाता है कि संसार में बहुत सारे लोग झूठ और अशुद्धि की जीवनशैली में फंसे हुए हैं। हमें सत्संग, सच्चाई और पवित्रता का अनुसरण करना चाहिए।
  2. सामाजिक संदर्भ:
    • समाज में कई लोग झूठ, धोखाधड़ी, और अनैतिक कार्यों में लिप्त होते हैं। यह श्लोक हमें सजग रहने और नैतिकता और सच्चाई के मार्ग पर चलने की प्रेरणा देता है।
  3. व्यक्तिगत संदर्भ:
    • व्यक्तिगत जीवन में हमें यह ध्यान रखना चाहिए कि हमारे कार्य और विचार शुद्ध और सच्चे हों। नकारात्मक विचारों और कर्मों से दूर रहना चाहिए ताकि हम अपने जीवन को सच्चाई और पवित्रता से संवार सकें।
  4. पेशेवर संदर्भ:
    • कार्यस्थल पर हमें ईमानदारी, सच्चाई और नैतिकता का पालन करना चाहिए। भले ही कई लोग अनुचित साधनों का उपयोग करके सफलता प्राप्त करने की कोशिश करते हों, हमें सही मार्ग पर चलना चाहिए।

यह श्लोक हमें इस बात का एहसास कराता है कि संसार में कई प्रकार की नकारात्मकता और अशुद्धि मौजूद हैं, लेकिन हमें सदैव सच्चाई, पवित्रता और नैतिकता का पालन करना चाहिए।

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